Posted by: Manu on: February 8, 2009
उनकी मु्स्कराहट, हमारे मासूम नतीजे,
थी जन्नत की चाहत, मिले दोजख के छींटे |
और लोग कहते खुदगर्जी इसे, खुदा देखता है……
गर ना हम होते शायर, तो अच्छा था,
दास्तान-ऐ-आशिकी तो न यूँ बयाँ करते |
छुपाने से जो चुप जाए वो मोहब्बत क्या है…………
मनु
Posted by: Manu on: February 7, 2009
जल्द ही आएगा वो दिन,
बैठेंगे साथ हम दोनों…..
कुछ तुम अपनी सुनाना,
कुछ में अपनी बताऊंगा ….
आखों में होगी सिर्फ़ तुम,
और में जागते हुए सपने सजाऊंगा..
हाथों में तब दे देना हाथ तुम अपना,
और तुम्हारी खुशबू से में मन को भीगाउंगा ….
खामोश रह कर भी कह दूंगा सब,
जो कह न पाया [...]
गुफ्तुगू ....