Posted by: Manu on: February 8, 2009
उनकी मु्स्कराहट, हमारे मासूम नतीजे, थी जन्नत की चाहत, मिले दोजख के छींटे | और लोग कहते खुदगर्जी इसे, खुदा देखता है…… गर ना हम होते शायर, तो अच्छा था, दास्तान-ऐ-आशिकी तो न यूँ बयाँ करते | छुपाने से जो चुप जाए वो मोहब्बत क्या है………… मनु
Posted by: Manu on: February 7, 2009
जल्द ही आएगा वो दिन, बैठेंगे साथ हम दोनों….. कुछ तुम अपनी सुनाना, कुछ में अपनी बताऊंगा …. आखों में होगी सिर्फ़ तुम, और में जागते हुए सपने सजाऊंगा.. हाथों में तब दे देना हाथ तुम अपना, और तुम्हारी खुशबू से में मन को भीगाउंगा …. खामोश रह कर भी कह दूंगा सब, जो कह न [...]
Posted by: Manu on: July 28, 2008
कुछ लम्हें त्रिवेणी के साथ……… समेटी है आज कुछ बिख्ररी यादों की कतरने, कुछ मीठे सपनो की रातें, मु्स्कराहटों का कोना | शब की दहलीज पर ढूढां करता हूं, रोशनी मैं….. दिल की दीवारों का भी है अजब आलम, परतें उखड़ती हैं पर रंग उतरता ही नही | इस घर के दरवाजे [...]
Posted by: Manu on: July 28, 2008
राजनीति इक दिन हमने सोचा चलो राजनीति पर कुछ लिखा जाये, सभी तलवारें चलाते है इसमे, अपनी कलम को भी परखा जाये | कुछ सोच ही रहा था, कि इक मोहिनी ने टी.वी. पर समाचार सुनाया, कुछ इस प्रकार था, एक छोटे से पत्रकार ने बहुत बड़ा तहलका मचाया मन मै इक गून्ज [...]
Posted by: Manu on: May 25, 2008
कुछ और त्रिवेणीयाँ…. उनकी फिराक का ही तो हैं ये असर, कि जा पहुचें हैं उनके और करीब | शुक्र फासिल का मनायें तो क्या गलत है… unki firaaq ka hi to hai yeh asar ki ja pahunche hai unke aur kareeb sukr faasil ka manay to kya galat hai… हर दामन-ऍ-मिज्गा [...]
गुफ्तुगू ....